भारत में दलित अधिकारों की आवाज़ अक्सर दबा दी जाती है, लेकिन जब चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’ ने भीम आर्मी की कमान संभाली, तो इस आंदोलन को एक नई ऊर्जा और नई दिशा मिली। खासकर सोशल मीडिया के ज़रिए उन्होंने जिस तरह से दलित युवाओं को जोड़ने और संगठित करने का काम किया है, वह किसी क्रांति से कम नहीं है।
इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे चंद्रशेखर आज़ाद ने भीम आर्मी को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स के माध्यम से एक ताक़तवर जन आंदोलन में बदला और कैसे उनकी सोशल मीडिया रणनीति ने भारत की राजनीति और सामाजिक सोच को प्रभावित किया।

भीम आर्मी: एक परिच
भीम आर्मी भारत एकता मिशन, जिसे आमतौर पर ‘भीम आर्मी’ के नाम से जाना जाता है, की स्थापना 2015 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में हुई थी। यह संगठन मुख्य रूप से दलित समाज को शिक्षा, अधिकार और आत्म-सम्मान के लिए जागरूक करता है।
भीम आर्मी का नारा — “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”, डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों पर आधारित है।
सोशल मीडिया से शुरू हुई क्रांति
पारंपरिक मीडिया अक्सर दलित मुद्दों को नजरअंदाज करता है, लेकिन चंद्रशेखर आज़ाद ने इस खामी को सोशल मीडिया के ज़रिए भरने की ठानी। उन्होंने Facebook, Twitter, YouTube और Instagram जैसे प्लेटफ़ॉर्म्स का उपयोग करके समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज़ को देशभर में पहुंचाया।
फेसबुक: भीम आर्मी की पहली आवाज़
फेसबुक भीम आर्मी के लिए एक मेगाफोन की तरह काम करने लगा। चाहे वह किसी अन्याय का वीडियो हो, या फिर लाइव प्रोटेस्ट की अपडेट—हर जानकारी सीधे जनता तक पहुंचाई गई।
लाइव वीडियो और ग्राउंड रिपोर्ट्स ने सोशल मीडिया पर वायरल होना शुरू किया और देखते ही देखते एक छोटा संगठन राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया।
ट्विटर पर ट्रेंडिंग आंदोलन
चंद्रशेखर और उनके समर्थकों ने Twitter पर #DalitLivesMatter, #ChandrashekharAzad, #StandWithBhimArmy जैसे कई हैशटैग ट्रेंड कराए। इससे दलित मुद्दे पहली बार मेट्रो शहरों और मीडिया की बहसों का हिस्सा बनने लगे।
उनका ट्विटर अकाउंट सिर्फ एक सूचना माध्यम नहीं, बल्कि विचारों की लड़ाई का मैदान बन चुका है।
YouTube और Instagram से युवाओं को जोड़ना
विचारों को आकर्षक और आसान भाषा में वीडियो फॉर्मेट में पहुंचाना—यही रहा चंद्रशेखर की टीम का अगला कदम। YouTube पर रैलीज़, भाषण, इंटरव्यू और डिबेट्स अपलोड की जाती हैं, ताकि वो देशभर के युवाओं तक पहुंच सकें।
Instagram के ज़रिए उन्होंने युवाओं को ब्रैंडिंग, स्टोरीज और ग्राफिक्स से जोड़ा और भीम आर्मी को एक पहचान दी।
डिजिटल रणनीति के प्रमुख पहलू
चंद्रशेखर आज़ाद की सोशल मीडिया रणनीति कोई सामान्य प्रचार नहीं थी। यह सोच-समझ कर बनाई गई एक क्रांतिकारी रणनीति थी:
- ग्राउंड और डिजिटल का संतुलन जहाँ ज़मीन पर भीम आर्मी संघर्ष कर रही थी, वहीं सोशल मीडिया पर यह लड़ाई विचारों की थी। यह रणनीति जमीनी हकीकत को सीधे जनता के सामने रखने में सफल रही।
- रियल टाइम रिपोर्टिंग
भीम आर्मी की टीम किसी घटना की सूचना होते ही तुरंत सोशल मीडिया पर लाइव जाती है। इससे लोगों को भरोसा होता है कि उनके मुद्दों को दबाया नहीं जाएगा। - इन्फ्लुएंसर्स और क्रिएटर्स के साथ सहयोग
चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, दलित राइटर्स और यूट्यूब क्रिएटर्स को जोड़कर आंदोलन को और भी व्यापक बना दिया।
युवाओं में सामाजिक चेतना का संचार
सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर आज़ाद ने केवल विरोध नहीं किया, बल्कि युवाओं को संगठित और सशक्त भी किया। उन्होंने बताया कि सिर्फ नारे लगाने से बदलाव नहीं आता—उसके लिए शिक्षा, एकता और एक विचारधारा ज़रूरी है।
राजनीति में भी डिजिटल ताक़त
2022 के विधानसभा चुनावों में जब चंद्रशेखर आज़ाद ने अपनी पार्टी बनाई, तो उन्होंने प्रचार के लिए मुख्य रूप से सोशल मीडिया का सहारा लिया। वे खुद प्रचार की बजाय युवाओं से जुड़े रहे—WhatsApp ग्रुप्स, ट्विटर स्पेसेज़ और इंस्टा लाइव के ज़रिए।
