Thursday, January 29, 2026

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UP चुनाव 2027: क्या चंद्रशेखर आज़ाद बनेंगे दलित राजनीति का चेहरा?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में हर चुनाव एक नया समीकरण लेकर आता है। 2027 का विधानसभा चुनाव भी इससे अलग नहीं होगा। इस बार चर्चा में एक ऐसा नाम है जो बीते कुछ सालों में दलित राजनीति का एक मज़बूत चेहरा बनकर उभरा है – चंद्रशेखर आज़ाद ‘रावण’। सवाल ये है कि क्या आने वाले चुनाव में वह सिर्फ एक नेता रहेंगे या फिर दलित राजनीति का केंद्र बनकर उभरेंगे?

चंद्रशेखर आज़ाद का अब तक का राजनीतिक सफर

चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने भीम आर्मी की स्थापना की, जो शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए काम करने वाला संगठन है। शुरूआती दौर में उनकी पहचान एक संघर्षशील सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बनी, लेकिन समय के साथ वे राजनीति में सक्रिय हुए।
2017 सहारनपुर हिंसा के बाद उनका नाम राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया। गिरफ्तारी, जेल और रिहाई – ये सब उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को और मज़बूत बनाते गए।

रावण’ नाम की राजनीतिक और सामाजिक पहचान

चंद्रशेखर ने खुद को ‘रावण’ नाम से जोड़कर दलित राजनीति में एक अनोखा संदेश दिया।

    • रावण को उन्होंने ब्राह्मणवाद विरोध का प्रतीक बताया।

    • इस नाम से उन्होंने परंपरागत पौराणिक कथाओं को चुनौती दी और सामाजिक विमर्श में नई बहस शुरू की।

    • दलित समाज में यह नाम सम्मान और विद्रोह का प्रतीक बन गया।

दलित वोट बैंक का समीकरण

उत्तर प्रदेश में लगभग 21% जनसंख्या दलित है, जो किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

    • अब तक इस वोट बैंक का बड़ा हिस्सा बहुजन समाज पार्टी (BSP) के पास रहा है।

    • लेकिन BSP की घटती लोकप्रियता और मायावती के घटते राजनीतिक सक्रियता के बीच, चंद्रशेखर आज़ाद एक विकल्प के रूप में उभर रहे हैं।

    • अगर वे सही रणनीति बनाते हैं, तो 2027 में दलित वोट का बड़ा हिस्सा अपने पक्ष में कर सकते हैं।

चंद्रशेखर की चुनावी रणनीति

    1. जमीनी स्तर पर संगठन – भीम आर्मी की संरचना और शिक्षा मिशन से जुड़े कार्य उन्हें आम जनता में लोकप्रिय बनाते हैं।

    2. सोशल मीडिया का प्रभावी इस्तेमाल – वे युवाओं को जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं।

    3. गठबंधन की राजनीति – अकेले चुनाव लड़ने की बजाय, वे अन्य दलों के साथ गठजोड़ की रणनीति अपनाकर अपनी ताकत बढ़ा सकते हैं।

बड़े चुनौतियां और विरोधी समीकरण

    • BSP का अस्तित्व – भले ही BSP कमजोर हो रही हो, लेकिन उसका वोट बैंक पूरी तरह से टूटना आसान नहीं है।

    • SP और BJP की मज़बूत पकड़ – यादव और सवर्ण वोट पर SP और BJP की मजबूत पकड़ है, जिसे तोड़ना आसान नहीं होगा।

    • छवि प्रबंधन – उन्हें ‘आक्रामक नेता’ की छवि से निकलकर ‘दूरदर्शी नेता’ की छवि बनानी होगी।

2027 में संभावित भूमिका

विश्लेषकों का मानना है कि 2027 में चंद्रशेखर आज़ाद तीन भूमिकाओं में से एक निभा सकते हैं:

    1. किंगमेकर – किसी भी गठबंधन को सत्ता दिलाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

    2. मुख्य विपक्षी चेहरा – अगर वे मजबूत प्रदर्शन करते हैं, तो विपक्ष के बड़े नेता बन सकते हैं।

    3. दलित राजनीति के निर्विवाद नेता – BSP की जगह लेकर दलित राजनीति के सबसे बड़े चेहरा बन सकते हैं।

जनता का रुझान और मीडिया की भूमिका

    • ग्रामीण इलाकों में उनकी पकड़ मजबूत हो रही है, खासकर पश्चिमी यूपी में।

    • सोशल मीडिया पर उनका फॉलोअर्स बेस तेजी से बढ़ रहा है, जो युवा मतदाताओं को प्रभावित करता है।

    • मीडिया में उनकी उपस्थिति उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिला रही है।

निष्कर्ष

UP चुनाव 2027 में चंद्रशेखर आज़ाद का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि वे अपनी राजनीतिक रणनीति कैसे बनाते हैं।
अगर वे दलित वोट बैंक को संगठित करने में सफल रहे, तो न केवल वे 2027 में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं, बल्कि आने वाले दशकों में दलित राजनीति का चेहरा बन सकते हैं।
दलित समाज में उनके लिए जो उम्मीदें हैं, उन्हें पूरा करना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।

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